कुछ तुम्हारी शिकायत व डाँट सुन सकूँ , कुछ अपने गिले शिकवे कह सकूँ , साँझा कर लें फिर से वे ढेरों सित्तम, कुछ हंस कर, कुछ आँसू बहाकर तुम हम.........
मॉं तेरी याद
कुछ तुम्हारी शिकायत व डाँट सुन सकूँ , कुछ अपने गिले शिकवे कह सकूँ , साँझा कर लें फिर से वे ढेरों सित्तम, कुछ हंस कर, कुछ आँसू बहाकर तुम हम.........
तेरी याद जो आई मेरी ऑंखें ढबढबाईं कुछ ख़ास है आज का दिन आज के दिन मनाते तुम्हारा जन्मदिन मगर अब वही दिन बन कर रह गया याद का दिन तुम जो रूठ चलीं जहाँ से ढूँढती हूँ तुम्हारे निशाँ से वो छोटी छोटी बातें, यादें बन समेट लेती हैं एक आलिंगन बन हर क्षण … Continue reading तुम्हारा जन्मदिन
They dressed and behaved in dignity Riches or poverty didn’t mar their ingenuity Those people who lived with simplicity Riding a bike or going by foot They cared not what the world would think Playing with marbles, spinning tops and Ludo So many didn’t feel the need to learn karate or Judo
मॉं बाप का वियोग कम्बख़्त चीज़ ही ऐसी है, जग भर के रिश्ते हों चाहे जीवन में.... न कोई पिता सम्मान, न कोई मॉं जैसी है कभी शायद वो भी रोए होंगे इस वियोग वश आज हमारी बारी है, बिछड़ना लगता भारी है क्या कल की पीढ़ी भी सहेगी यह सब? कौन जाने यह वियोग किस किस पर भारी है सिकीलधी
The good old radio has come a long way. Let's check out.
She shall be remembered fondly by us....... The Iron Lady who lost her iron to fate..........
कितना शांत, कितना ठहरा, लगता था उनका चेहरा, बाबा ने हम सब से दूर हो, जब पहना था मौत का सेहरा.......
चले गए जो आज से पहले, उन दिवंगत आत्माओं को प्रणाम.....