कवि गोष्ठी 

A celebration of Hindi Diwas by Kenbharti on 14/9/18 when the topic was past and present poets and their works.

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सतगुरू स्वरूप

सतगुरू एक लेता नया आकार एवं बनता अनेक से एक। चोला बदल कर आया फिर से गुरू। निरंकारी समुदाय की सतगुरू माता सविंदर हरदेव के देहांत पश्चात उनकी सुपुत्री के सहयोग भरे कुछ शब्द पेश हैं