छुआ उसने!

छुआ उसने कुछ इस तरह आज जैसे कभी छुआ न था पहले कभी उसकी नज़रों ने छुआ बिजली की तरह और दिल के हर कोने में तरंग सी जागी उसके हाथों बीच समाया मेरा हाथ और जन्नत का हो गया अहसास  वो चुम्बन गालों पर दिया लेकिन… आत्मा की गहराई को थपकी सी मिली  छुआ उसने अपने प्रेम भरे शब्दों से  और मैं ने गंगा सी पवित्रता महसूस की उसके आलिंगन का मीठा अहसास  महका गया मेरी रूह को दे सुखद आभास  छुआ उसने कुछ इस तरह से आज इतराई मैं खुद पे, जागा नया विश्वास  हुई हूँ आज बहुमूल्य उसकी वजह से  जिसने मुझे खुद मुझसे ही बेख़बर किया  सिकीलधी 

माता से प्रार्थना

हे मॉं अपनी आसीस रखना भूलों को राह दिखाना मॉं सब पर अपनी कृपा बनाए रखना तेरे दर पे जो भी आए मॉं हर उस प्राणी पर महर करना मॉं तेरे भक्तों की है विनती याद रखना हमें हर गिनती सिकलधी करती है अरदास सदा रखना चरणों के पास जो कोई आए दासी दास तेरे … Continue reading माता से प्रार्थना

यह इमारतों की है बस्ती!

यह इमारतों की है बस्ती , दूर तलक ईंट पत्थर की हस्ती ! आकाश को ज्यूँ चूमने लगतीं , लम्बी इमारतों की आवारागर्दी! चाहे दिन हो गर्म या हो मौसम में सर्दी , इन लम्बी रहगुज़र में आबादी पलती! ढलती धूप को शांत सा साया, जाने कितनों  के मन को भाया ! आँच दिखाकर हल्की व ठंडी, धूमिल किरनों की सरपरस्ती ! चमक बिखेर मकानों के गिर्द , जैसे स्वयं को उन पर ओढ़ती! इस बस्ती की बात ही निराली , ज्यूँ जादूगर की माया नगरी ! कारों बसों के कोलाहल संग, एक अजब सी ऊर्जा उपजी! हैडलाइटों की सारी झिलमिलाहट , बिल्डिंगों की खिड़कियों पर बरसती !

मॉं की सूरत

उसने कहा देख कर तुम्हें  याद आती है तुम्हारी माँ की और मैं फूली न समाई ह्रदय कुछ गद गद सा हुआ  मामीजी भी बोली मुझे देख तुम तो साक्षात अपनी मॉं दिखती हो मन ही मन प्रसन्नता जागी और मैं इतराई खुद पर आईना जो देखती हूँ जाकर झलक उसकी ही सामने आती है  वह मॉं जो छोड़ चली जहाँ को अपनी ही सूरत में ख़ूबसूरती बन पनपती है  उसकी सूरत बनी मेरा अभिमान व अनजाना अनकहा स्वाभिमान उसकी सूरत से ही मिलती मुझे पहचान वर्ना शायद मेरी हस्ती रह जाती बेनाम सिकीलधी 

प्रेम से रहो!

https://videopress.com/v/CM74pns4?resizeToParent=true&cover=true&preloadContent=metadata&useAverageColor=true जीना है जब तक. क्यों न करे मोहब्बत ! रखें भाई चारा, न लें किसी की तोहमत! यादों की छोड़ छाप जहां में, ख़ुशनुमा करें खुद की क़िस्मत! आपसी नाता निभाएं , ईश्वर की मान नेमत! सिकीलधी