कवि गोष्ठी 

A celebration of Hindi Diwas by Kenbharti on 14/9/18 when the topic was past and present poets and their works.

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जन्मदिन

जन्मदिन की ख़ुशी तो होती है मगर क्या जीवन सत्य को समझ सके हम !

सतगुरू स्वरूप

सतगुरू एक लेता नया आकार एवं बनता अनेक से एक। चोला बदल कर आया फिर से गुरू। निरंकारी समुदाय की सतगुरू माता सविंदर हरदेव के देहांत पश्चात उनकी सुपुत्री के सहयोग भरे कुछ शब्द पेश हैं

खटिया और कहानी

    दादी नानी की यह कहानी आँगन में जब बरसा पानी समेटा जा जल्दी से बिस्तर को खटिया तो थी भीग ही जानी रस्सी उसकी बदलनी ही थी हो चली थी बहुत ही पुरानी यादें समाई थी उस रस्सी पर नन्द भाभी की सुनी हर कहानी बोझ तले उन सब क़िस्सों के रस्सी ने … Continue reading खटिया और कहानी

एैसी वसीयत

एैसी एक वसीयत तुम कर जातीं नाम मेरे तुम्हारे गुन कर जातीं जिन से थी तुम्हारी पहचान एै मॉं मैं बस तेरे आँगन की एक हूँ क्यारी याद हैं आतीं बहुत ही मुझको बातें तुम्हारी वह प्यारी प्यारी जो थीं कभी सिखलाई तुमने उन बातों पर दिल जाता बलिहारी सिकीलधी

तेरी याद

लो फिर से चली आई धुंधली सी तेरी याद दिल करने लगा फ़रियाद पैरहन पे गिरे यूँ आॉंख से क़तरे ज्यूँ ऑंचल में आ गई बरसात तेरी याद दम लेने ना देती घायल रहता है दिल का हाल मेरी यह तड़प, ये बेचैनी देती रुसवाई, करती बदनाम लो फिर से चली आई धुंधली सी तेरी … Continue reading तेरी याद