सभ्यता

सभ्य समाज भी कभी कभी बहुत असभ्य व्यवहार कर जाता है। कैसे ?

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जन्मदिन

जन्मदिन की ख़ुशी तो होती है मगर क्या जीवन सत्य को समझ सके हम !

सतगुरू स्वरूप

सतगुरू एक लेता नया आकार एवं बनता अनेक से एक। चोला बदल कर आया फिर से गुरू। निरंकारी समुदाय की सतगुरू माता सविंदर हरदेव के देहांत पश्चात उनकी सुपुत्री के सहयोग भरे कुछ शब्द पेश हैं