तितलीयॉं

तितलीयॉं ओढ़े सफ़ेद लिबास दो तितलियॉ करती इक दूजे से अठखेलियाँ पेड़ पतीयॉं, डाली व कलियाँ बूझ न पाती उनकी पहेलियॉं कैसी अनोखी ये दो सखियॉं करती जाने कौन सी बतियॉं कभी उड़तीं वो डाली डाली कभी थिरकतीं क्यारी क्यारी इनकी चुप्पी भरी बेआवाज़ सदाऐं जाने किस रसिया को लुभाऐं ख़ामोश दास्ताँ अपने दिल की … Continue reading तितलीयॉं