कर गए चलाना

  मीठी सी मुस्कान वह प्यारी बहुत दिलों को देती दिलदारी चेहरे की मासूमियत झलकती गम्भीर सी सोच के तले कोटू अन्कल वह बातें प्यारी याद सदा रहेंगी न्यारी बहुत अचानक किया चलाना निरंकार की शरण था जाना वो बचपन के छुट्टियों के दिन जब मनु व रीटा हांगकांग आते वह आपका हर रात हमारा … Continue reading कर गए चलाना

बर्सी का दिन

फिर आ गया आज वह दिन क्ष्राद्ध का महीना और बर्सी का दिन हर वर्ष यही तारीख़ जब आती दर्द भरी कुछ यादें ले आती डैडी आपका हम सब को छोड़ जाना जहाँ से दूर अपना जहाँ बनाना और फिर बस यादों की सीमा में बस जाना हुए तेइईस साल जब आप हुए रवाना मेरे … Continue reading बर्सी का दिन

सतगुरू स्वरूप

सतगुरू एक लेता नया आकार एवं बनता अनेक से एक। चोला बदल कर आया फिर से गुरू।
निरंकारी समुदाय की सतगुरू माता सविंदर हरदेव के देहांत पश्चात उनकी सुपुत्री के सहयोग भरे कुछ शब्द पेश हैं

We Shall miss from now on!

That beauteous face in pleasure and pain

Has left many orphaned and departed

The Almighty gave him all but a hundred years

of service in this world that needed awareness

of righting the wrongs that Humanity committed 

And now HE rests in the lap of Heavenly Father

HE who didn't forsake us all

HE who was known as Dada J.P. Vaswani

A tribute that cannot be justified in words

For HE was the ONE unique being of God

Who never claimed Himself to be God.