भारतीय प्रेम
इस भारतीय प्रेम की परिभाषा ही कुछ अलग
औपचारिकता दिखाते सुनाते न हमजोली
एक दूजे के सहायक बन जीवन के अंतिम छोर तक
अंधियारे की काली रात से उज्ज्वल भोर तलक
साथी, हमसफ़र ही तो हाथ बटाएगा
जब संतान जवान हो, दूर जा बसे
वही तो है जो हर निवाले पर साथ निभाएगा
बती बुझानी हो या फिर दही फ्रिज में रखनी हो
गैस का सिलेंडर बदलना हो या चूल्हा बुझाना हो
सुबह की चाय संग साथ बैठ अख़बार पढ़ना
दूध वाले से बर्तन में दूध लेने से नल से बाल्टी भरने तक
सब काम सहज हो जाता है, जब साथी अपना, संग हो
गुडमार्निंग व गुडनाईट की औपचारिकता रहे न रहे
हरि ऊँ व जय श्री कृष्णा, या फिर ख़ुदा की इबादत...
धर्म करम के कार्य करते दोनों इक दूजे संग
सिकीलधी