तेरी हस्ती की सारी यह मस्ती घुल के धरती में मिल जाएगी
विधाता
तेरी हस्ती की सारी यह मस्ती घुल के धरती में मिल जाएगी
आया मेरे आंगन एक मुसाफ़िर , मतवाली सी चाल दिखाने.......सिकीलधी निहारे पेड़ के भीतर बसी कोई अपने पसंद की चीज़ ढूँढने ..........सिकीलधी चला है उड़ने यहाँ से अब वो, कहीं और आशियाँ बनाने......सिकीलधी थामे मुख में ढाल की टहनी, नैनों से चहूं ओर निहारे.......सिकीलधी
छाया है आज एक सन्नाटा मानव बैठा पहनकर मुख्खौटा भयभीत हुए सभी जनगण सूना सा दिखता हर प्रांगण नहीं यह पहली बार हुआ है काल का सुदर्शन चक्र चला है महामारी ने किया आतंकित विश्व का हर जन हुआ सीमित याद करो मॉं जब उपद्रव मचा था महिषासुर का तुम ने वध किया था दानव दैत्य … Continue reading आओ मैय्या
Baat niharey panchhi albela, bhor gayi aayee saanjh ki vela, Tanhai main udan raas na aaye, preetam sang lagta hai mela Sikiladi
Peeli Sarson si umang, tiss par saja lal rang Bhari do-pahar main yoon khadre, dil main jagate tarang sikiladi
शायद वह नब्ज़ दर्द देने वाली
किसी ग़ैर की पकड़ में आ गई होगी
ज़िक्र छेड़कर मेरे इतिहास के पन्नों का
उसे कुछ मज़ा शायद आया होगा
सदियों से सताया तुमने
किसने दिया है यह हक़
अच्छा किया जो तुम ने
औक़ात याद दिला दी मुझ को
जानती थी जिस घर को अपना
उसी की बन्दी बन कर रह गई
साड़ीयॉं हर औरत की शान जो देती अलग पहचान