ऐ पंछी कल फिर आना, बाट निहारूँगी मैं तेरी
पंछी प्यारे
ऐ पंछी कल फिर आना, बाट निहारूँगी मैं तेरी
लौट आएँगे फिर वह सुहाने बहारों के दिन.......
उजाला करने वाले को देकर अपनी छाया वह नादान समझ बैठा ख़ुद को सरमाया बना कर बुत भगवान का मन्दिर के लिए वह अन्जान ख़ुद को समझ बैठा विधाता सिकीलधी
सो गई इंसानियत, दिन में रात हो गई बेदर्दी की आज एक नई दास्तान हो गई खिन्न हुआ मन, हरकतों से बू आने लगी घिनौनी शरारत एक, किसी की जान ले गई जाग उठी हैवानियत, इब्तिदा अब हो गई क्रूरता इतनी की, जी मिचलाने की हालत हो गई दूजे को कहते हैं जानवर, पशुत्व प्रकीर्ति हो गई तुमसे भले तो पशु, दुख … Continue reading ईंसानियत
Samarpan Divas of Baba Hardev Singh Ji, is being marked by the entire Nirankari Community all over the world, maintaining the social distance, without gatherings through Soical media. Babaji passed away on 13th May 2016.
ओड़ ली मॉं आज फिर तेरी यादों की चादर तुझे याद करआज दिल हुआ जाए बेकल तुम थी तो दुनिया का अंदाज़ अलग था तुम्हारे जाने से, रिश्तों का फीका सा रंग था याद आती हैं बातें वह बचपन वाली सुहानी कितनी ही रातों में सुनी हमने तुमसे कहानी ख़ुद पढ़ी लिखी न हो कर भी, हम … Continue reading यादों की चादर
हम धरती पे जन्मे धरती पर ही बोझ बने और फिर धरती में ही समाए धरती हमें प्यार से बुलाए अपनी आग़ोश में लेती सुलाए प्रियजन चाहे रहते रोते रुलाए उनको यह बात कौन समझाए जिसे जानते पीड़ित असहाय और भरते सिसकीयों भरी हाय उनका अपना अब लौट कर धरती मॉं की गोद में सो … Continue reading धरती मॉं
तेरी हस्ती की सारी यह मस्ती घुल के धरती में मिल जाएगी
छाया है आज एक सन्नाटा मानव बैठा पहनकर मुख्खौटा भयभीत हुए सभी जनगण सूना सा दिखता हर प्रांगण नहीं यह पहली बार हुआ है काल का सुदर्शन चक्र चला है महामारी ने किया आतंकित विश्व का हर जन हुआ सीमित याद करो मॉं जब उपद्रव मचा था महिषासुर का तुम ने वध किया था दानव दैत्य … Continue reading आओ मैय्या
शायद वह नब्ज़ दर्द देने वाली
किसी ग़ैर की पकड़ में आ गई होगी
ज़िक्र छेड़कर मेरे इतिहास के पन्नों का
उसे कुछ मज़ा शायद आया होगा