तेरी हस्ती की सारी यह मस्ती घुल के धरती में मिल जाएगी
विधाता
तेरी हस्ती की सारी यह मस्ती घुल के धरती में मिल जाएगी
छाया है आज एक सन्नाटा मानव बैठा पहनकर मुख्खौटा भयभीत हुए सभी जनगण सूना सा दिखता हर प्रांगण नहीं यह पहली बार हुआ है काल का सुदर्शन चक्र चला है महामारी ने किया आतंकित विश्व का हर जन हुआ सीमित याद करो मॉं जब उपद्रव मचा था महिषासुर का तुम ने वध किया था दानव दैत्य … Continue reading आओ मैय्या
शायद वह नब्ज़ दर्द देने वाली
किसी ग़ैर की पकड़ में आ गई होगी
ज़िक्र छेड़कर मेरे इतिहास के पन्नों का
उसे कुछ मज़ा शायद आया होगा
सदियों से सताया तुमने
किसने दिया है यह हक़
अच्छा किया जो तुम ने
औक़ात याद दिला दी मुझ को
जानती थी जिस घर को अपना
उसी की बन्दी बन कर रह गई
साड़ीयॉं हर औरत की शान जो देती अलग पहचान
चलो आज समोसे का मज़ा लेते हैं
बदलते दशक के संग बदले कई हालात।
आओ पढ़ कर देखो कैसे बदले हैं हाल।
Zindagi ka hoga jab khatm afsana
Tum se mein bhi milne aoongi wahaan
एक गुमशुदा भाई को गरवापसी की दुहाई।
एक प्रयास, शायद यह कविता उसे ले आए पास।