आओ मैय्या

छाया है आज एक सन्नाटा मानव बैठा पहनकर मुख्खौटा भयभीत हुए सभी जनगण सूना सा दिखता हर प्रांगण नहीं यह पहली बार हुआ है काल का सुदर्शन चक्र चला है महामारी ने किया आतंकित विश्व का हर जन हुआ सीमित याद करो मॉं जब उपद्रव मचा था महिषासुर का तुम ने वध किया था दानव दैत्य … Continue reading आओ मैय्या

आवारा पन्ने

शायद वह नब्ज़ दर्द देने वाली

किसी ग़ैर की पकड़ में आ गई होगी

ज़िक्र छेड़कर मेरे इतिहास के पन्नों का

उसे कुछ मज़ा शायद आया होगा