सुनहरा टीका!

चॉंद का चमकता नूर है साहिबा

बनी मेरी तक़दीर है

ज्यूँ ज्यूँ चमक रौशन होती है

आसमाँ की रौनक़ तदबीर है

सिकीलधी

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