चॉंद का चमकता नूर है साहिबा बनी मेरी तक़दीर है ज्यूँ ज्यूँ चमक रौशन होती है आसमाँ की रौनक़ तदबीर है सिकीलधी
प्रकृति
बादलों के शहर!
बचपन के वे आसमानों वाले महल हमारे मस्तिष्क में मचाते चहल पहल आपने भी यकीनन इन बादलों को देख कई अलग-अलग तरह के आकार जाने होंगे कभी वही बादल स्वप्न से अति मोहक व कभी भयानक क्रूर रूप वाले दिखते होंगे सिकीलधी Published in the July Edition of “Hindu Deep” by Hindu Council of Kenya
आग का गोला!
15/07/26 भोर sunrise नैरोबी Nairobi
धुंधला आसमाँ!
A Foggy Morning 18/08/25 Nairobi
खुला आसमाँ
पुकारता है प्रकृति प्रेम जब जबउत्साह बढ़ता है तब तबखुले आसमाँ से आती पुकारख़ुद को कोई रोके कब तक सिकीलधी