Hindi poetry
खुशाली!
बेटी मेरी अपनी हो या फिर किसी और की- बेटी ही होती है । यह कविता मेरी सखी अरूना की ओर से उसकी बेटी खुशाली के लिए एक प्यारी सी भेंट । जन्मदिन मुबारक हो खुशाली ।
शरद पूनम
मैं!
सामूहिक श्राद्ध तर्पण २०२३
ऐ मृत्यु! O Death!
Exclusive celebration As the sequel of this month's 'Exclusive-Festival' we present the new issue of Exclusive-Kenya In the words of Sarika Flor, Editor of Ananya-Kenya In this issue you will read glimpses of Kenya's Hindi poets, writers and artworks - -Editorial - Sarika Flor - "A New Journey"-Article - Yoga - Sarika Flore Article - … Continue reading ऐ मृत्यु! O Death!
सीखी न वह/ Seekhi na woh!
आज के #EmbraceEquity वाले समय भी कुछ ग्रहणियाँ ह्रदय में अश्रु छिपा बाहरी तौर से मुस्कुराती दिखती है । यह कविता उन स्त्रियों को समर्पित है जिन्होंने खुद को कहीं खो दिया है । क्या आप को यह कविता दिल से लगेगी? क्या यह कहानी आपकी है? क्या यह आपकी किसी अपनी की याद दिलाती हैं? क्या आप की मॉं अथवा दादी/नानी भी इस पीड़ा से गुज़र चुकीं हैं? अपनी टिप्पणी अवश्य साझा कीजिएगा ।
इन्तज़ार/ Intezar
पूछो न!
पूछो न न पूछो तुम मुझसे मेरे दुखों का कारण सह न सकूँगी और तुम्हें कुछ कह न सकूँगी बस ख़ामोश निगाहों से दर्दे दिल को बयॉं करूँगी पाक आफ़ताब की ओढ़े आबरू ज़मीन में ही गढ़ सी जाऊँगी होंठ सीये भी एक अरसा हो चला लफ़्ज़ों ने कब का साथ छोड़ दिया बस ये ऑंखें हैं जो दर्पण बन मन का कह जाती हैं जो कहना ही न था जी रही हूँ बोझ लिए दिल पर डरती हूँ … बाँध टूट न जाए अब सब्र का बिखर न जाए ज़ख़्मी जिगर बह न जाए नयनों से धार चुप हूँ फिर भी कोलाहल है डर है कहीं फट ही न पड़े दुखती हर नफ़्स जो दबाए हूँ सिकीलधी