दर्द की भी एक अलग ही दास्तान होती है ।कभी चेहरे से जा़हिर हो, कभी चाल डाल से दिखाई देता है । जाने किस किस प्रकार दर्द अपना अहसास कराता है ।
Shayari
रात का मुसाफ़िर!
बूँद बहार!
मैं!
सामूहिक श्राद्ध तर्पण २०२३
दर्द की दास्तान!
चाय/ Chai
तितली
इन्तज़ार/ Intezar
पूछो न!
पूछो न न पूछो तुम मुझसे मेरे दुखों का कारण सह न सकूँगी और तुम्हें कुछ कह न सकूँगी बस ख़ामोश निगाहों से दर्दे दिल को बयॉं करूँगी पाक आफ़ताब की ओढ़े आबरू ज़मीन में ही गढ़ सी जाऊँगी होंठ सीये भी एक अरसा हो चला लफ़्ज़ों ने कब का साथ छोड़ दिया बस ये ऑंखें हैं जो दर्पण बन मन का कह जाती हैं जो कहना ही न था जी रही हूँ बोझ लिए दिल पर डरती हूँ … बाँध टूट न जाए अब सब्र का बिखर न जाए ज़ख़्मी जिगर बह न जाए नयनों से धार चुप हूँ फिर भी कोलाहल है डर है कहीं फट ही न पड़े दुखती हर नफ़्स जो दबाए हूँ सिकीलधी