धरती मॉं

हम धरती पे जन्मे धरती पर ही बोझ बने और फिर धरती में ही समाए धरती हमें प्यार से बुलाए अपनी आग़ोश में लेती सुलाए प्रियजन चाहे रहते रोते रुलाए उनको यह बात कौन समझाए जिसे जानते पीड़ित असहाय और भरते सिसकीयों भरी हाय उनका अपना अब लौट कर धरती मॉं की गोद में सो … Continue reading धरती मॉं

Nature’s Trail – 3

PREAगगन के बदन पर छाई लालिमा तीर कमान की फैल गई गरिमा काश कि हो ईश्वर का सन्देश कोविड १९ को भगाने का आदेश सिकीलधीुSpread on the body of the sky, the tinted bow and arrow, comes as a message from above to shoot away Covid19 .......Sikiladi

मुसाफ़िर / Traveler

आया मेरे आंगन एक मुसाफ़िर , मतवाली सी चाल दिखाने.......सिकीलधी निहारे पेड़ के भीतर बसी कोई अपने पसंद की चीज़ ढूँढने ..........सिकीलधी चला है उड़ने यहाँ से अब वो, कहीं और आशियाँ बनाने......सिकीलधी थामे मुख में ढाल की टहनी, नैनों से चहूं ओर निहारे.......सिकीलधी

आओ मैय्या

छाया है आज एक सन्नाटा मानव बैठा पहनकर मुख्खौटा भयभीत हुए सभी जनगण सूना सा दिखता हर प्रांगण नहीं यह पहली बार हुआ है काल का सुदर्शन चक्र चला है महामारी ने किया आतंकित विश्व का हर जन हुआ सीमित याद करो मॉं जब उपद्रव मचा था महिषासुर का तुम ने वध किया था दानव दैत्य … Continue reading आओ मैय्या

आवारा पन्ने

शायद वह नब्ज़ दर्द देने वाली

किसी ग़ैर की पकड़ में आ गई होगी

ज़िक्र छेड़कर मेरे इतिहास के पन्नों का

उसे कुछ मज़ा शायद आया होगा