सरमाया

उजाला करने वाले को देकर अपनी छाया वह नादान समझ बैठा ख़ुद को सरमाया बना कर बुत भगवान का मन्दिर के लिए वह अन्जान ख़ुद को समझ बैठा विधाता सिकीलधी

ईंसानियत

सो गई इंसानियत, दिन में रात हो गई  बेदर्दी की आज एक नई दास्तान हो गई खिन्न हुआ मन, हरकतों से बू आने लगी  घिनौनी शरारत एक, किसी की जान ले गई  जाग उठी हैवानियत, इब्तिदा अब हो गई  क्रूरता इतनी की, जी मिचलाने की हालत हो गई  दूजे को कहते हैं जानवर, पशुत्व प्रकीर्ति हो गई  तुमसे भले तो पशु, दुख … Continue reading ईंसानियत

Truck Art

*ट्रकों के पीछे जो..**लिखा जाता है.,**वो अब इंसानों के पीछे..**लिखने की नौबत आ गई है.,*_*"KEEP DISTANCE"*_ Buri Thook wale, tera munh kaladurr raho, gale na milojaldi jaldi haath sabun se dho loMAINTAIN SOCIAL DISTANCE

अम्माँ का पुलाव

ईश्वर भी मुस्कुराए होंगे शायद सुनके ये ईश्वर का स्वर। अम्माँ ने अब चूल्हा बुझा कर, पुलाव मेज़ पर परोस दिया था। हम सब प्राणी भी पुलाव के उन सामग्रियों की ही तरह, अपना ही राग अलापते हैं और ईश्वर की कृपा भुला ख़ुद अपना ही गुण गाते हैं।

यादों की चादर

ओड़ ली मॉं आज फिर तेरी यादों की चादर तुझे याद करआज दिल हुआ जाए बेकल तुम थी तो दुनिया का अंदाज़ अलग था तुम्हारे जाने से, रिश्तों का फीका सा रंग था याद आती हैं बातें वह बचपन वाली सुहानी कितनी ही रातों में सुनी हमने तुमसे कहानी ख़ुद पढ़ी लिखी न हो कर भी, हम … Continue reading यादों की चादर