कविता
झुके फूल!
विश्व हिन्दी दिवस २०२४
डर!
मॉं सी!
यादें!
बिखरे बाल!
दर्द की भी एक अलग ही दास्तान होती है ।कभी चेहरे से जा़हिर हो, कभी चाल डाल से दिखाई देता है । जाने किस किस प्रकार दर्द अपना अहसास कराता है ।
खुशाली!
बेटी मेरी अपनी हो या फिर किसी और की- बेटी ही होती है । यह कविता मेरी सखी अरूना की ओर से उसकी बेटी खुशाली के लिए एक प्यारी सी भेंट । जन्मदिन मुबारक हो खुशाली ।
रात का मुसाफ़िर!
धूप का टुकड़ा! A piece of Sun!
View from the balcony: 07/11/23, Nairobi Sunrise this morning Brought in new hope. As I was awakened to a beautiful day The rains along with freshness had brought in gloom Hence the Sun appeared as a blessing.