अपनी सभ्यता भूल, निभाया पराया धर्म। अपनों को तज, ग़ैरों को मनाया ।
हैप्पी न्यू ईयर
अपनी सभ्यता भूल, निभाया पराया धर्म। अपनों को तज, ग़ैरों को मनाया ।
फिर आ गया आज वह दिन क्ष्राद्ध का महीना और बर्सी का दिन हर वर्ष यही तारीख़ जब आती दर्द भरी कुछ यादें ले आती डैडी आपका हम सब को छोड़ जाना जहाँ से दूर अपना जहाँ बनाना और फिर बस यादों की सीमा में बस जाना हुए तेइईस साल जब आप हुए रवाना मेरे … Continue reading बर्सी का दिन
जन्मदिन मनाना, झूमना गाना और अपनों संग मिल हाहाकार मचाना।
A celebration of Hindi Diwas by Kenbharti on 14/9/18 when the topic was past and present poets and their works.
सभ्य समाज भी कभी कभी बहुत असभ्य व्यवहार कर जाता है। कैसे ?
जन्मदिन की ख़ुशी तो होती है मगर क्या जीवन सत्य को समझ सके हम !
Raksha Bandhan - The Hindu Festival celebrates the bond between brothers and sisters.
सतगुरू एक लेता नया आकार एवं बनता अनेक से एक। चोला बदल कर आया फिर से गुरू। निरंकारी समुदाय की सतगुरू माता सविंदर हरदेव के देहांत पश्चात उनकी सुपुत्री के सहयोग भरे कुछ शब्द पेश हैं
दादी नानी की यह कहानी आँगन में जब बरसा पानी समेटा जा जल्दी से बिस्तर को खटिया तो थी भीग ही जानी रस्सी उसकी बदलनी ही थी हो चली थी बहुत ही पुरानी यादें समाई थी उस रस्सी पर नन्द भाभी की सुनी हर कहानी बोझ तले उन सब क़िस्सों के रस्सी ने … Continue reading खटिया और कहानी
लोग चले जाते चुपचाप इस जहान से , यादों का कारवाँ पीछे छोड़ जाते हैं।