क्या हिन्दुओं को मिटाया जा सकता है?
क्या मिटाओगे तुम!
क्या हिन्दुओं को मिटाया जा सकता है?
कान्हा संग मिल, अठखेली करता गोपियों संग यह रास गरबा करता
भाषा न मात्र एक बोल चाल होती है! वह तो देश की संस्क्रती की अभिलाषा होती है! अपने संस्कारों का प्रतिबिंब, अति सम्माननीय होती है! राष्ट्र भाषा किसी भी राष्ट्र का गौरव चिन्ह होती है!
मैं तुझमें , तू मुझमें रसिया, राधा ख़ुद में कान्हा निहारे
मैं ही तुम, तुम ही मैं, एै श्याम सलोने, कान्हा प्यारे
बादलों के शहर की जानी अनजानी, नई पुरानी, अजब पर पहचानी सी बातें रोमांचित करती हैं।
मॉं की याद जब भी है आई, दर्द हुआ इतना की बेटी बिलबिलाइ।
चाहा था समेट लूँ यादों के धागे पिरो लूँ बीते कल के कुछ मोती मगर कमबख़्त दिल दे गया धोखा हर याद पिरोने से पहले कर गया दगा़ आँखों से बहने लगी एक एक याद गुज़रे समय की हूक करती फ़रियाद न बुला! न रुला! एै दिल ए नादान मुझे अतीत बन कर ही रहने … Continue reading यादें
मीठी सी मुस्कान वह प्यारी बहुत दिलों को देती दिलदारी चेहरे की मासूमियत झलकती गम्भीर सी सोच के तले कोटू अन्कल वह बातें प्यारी याद सदा रहेंगी न्यारी बहुत अचानक किया चलाना निरंकार की शरण था जाना वो बचपन के छुट्टियों के दिन जब मनु व रीटा हांगकांग आते वह आपका हर रात हमारा … Continue reading कर गए चलाना
अपनी सभ्यता भूल, निभाया पराया धर्म। अपनों को तज, ग़ैरों को मनाया ।