लो फिर से चली आई धुंधली सी तेरी याद दिल करने लगा फ़रियाद पैरहन पे गिरे यूँ आॉंख से क़तरे ज्यूँ ऑंचल में आ गई बरसात तेरी याद दम लेने ना देती घायल रहता है दिल का हाल मेरी यह तड़प, ये बेचैनी देती रुसवाई, करती बदनाम लो फिर से चली आई धुंधली सी तेरी … Continue reading तेरी याद
कविता
तुम जो देख पाती
काश कि हर मॉं अपने जीवन काल में अपने परिवार जनों को एकजुट देख पाए।
मॉं से मायका (Maternal Home)
मॉं है तो मायका भी है मॉं है तो मन महका भी है वह प्यार दुलार व दुआ की बहार वो घर बुलाने के बहाने हज़ार वो हर फ़रमाइश का पूरा करना वो घंटों बैठ कर बातें करना मॉं है तो मायका भी है मॉं है तो मन महका भी है वो मायके जाकर सब … Continue reading मॉं से मायका (Maternal Home)
कमाऊ लाल
अब अपना बोझ वह तय कर लेगा, पुत्र है अब कमाऊ लाल, एक का ख़र्चा तो कम होगा, पुत्र जो बन गया कमाऊ लाल. बेटी के दहेज की कम हुई चिन्ता, कुछ मदद करेगा मेरा लाल, अब पेनशन अपनी बचत बनेगी, घर में है अब कमाऊ लाल.
रक्षा बन्धन
याद है बचपन की अठखेली वो पूछना एक दूजे से पहेली खेल खिलौने अद्भुत न्यारे गेंद व गुड़ीयॉं प्यारे प्यारे वो रंग भरी लम्बी पिचकारी ग़ुबारों में जल भर होली की तैयारी वो छत पर खेलना छुपन छुपाई बात बात पर करना लड़ाई याद आते हैं मेरे भैया प्यारे, वो दिल्ली के साँझ सखारे वो … Continue reading रक्षा बन्धन
राखी वाला लचीला धागा
राखी वाला आया त्यौहार घर में ज्यूँ आ गई हो बहार बहन फुदकती भाई के गिर्द सजाती थाली लिए स्नेह बिंदु लाती राखी वाला लचीला धागा चन्दन टीका, कुमकुम वाला सुहागा अक्षत भी माथे पर भैया के लगाती दीप जला मन उज्जवल करती आरती रक्षक भ्राता की उतारती उसकी लम्बी आयु की कामना करती भाई … Continue reading राखी वाला लचीला धागा