Raksha Bandhan - The Hindu Festival celebrates the bond between brothers and sisters.
रक्षा-बन्धन का वार
Raksha Bandhan - The Hindu Festival celebrates the bond between brothers and sisters.
सतगुरू एक लेता नया आकार एवं बनता अनेक से एक। चोला बदल कर आया फिर से गुरू। निरंकारी समुदाय की सतगुरू माता सविंदर हरदेव के देहांत पश्चात उनकी सुपुत्री के सहयोग भरे कुछ शब्द पेश हैं
दादी नानी की यह कहानी आँगन में जब बरसा पानी समेटा जा जल्दी से बिस्तर को खटिया तो थी भीग ही जानी रस्सी उसकी बदलनी ही थी हो चली थी बहुत ही पुरानी यादें समाई थी उस रस्सी पर नन्द भाभी की सुनी हर कहानी बोझ तले उन सब क़िस्सों के रस्सी ने … Continue reading खटिया और कहानी
लोग चले जाते चुपचाप इस जहान से , यादों का कारवाँ पीछे छोड़ जाते हैं।
मॉं की याद
दिल करे फ़रियाद
काश बहुत से शेष रह गए
लो फिर से चली आई धुंधली सी तेरी याद दिल करने लगा फ़रियाद पैरहन पे गिरे यूँ आॉंख से क़तरे ज्यूँ ऑंचल में आ गई बरसात तेरी याद दम लेने ना देती घायल रहता है दिल का हाल मेरी यह तड़प, ये बेचैनी देती रुसवाई, करती बदनाम लो फिर से चली आई धुंधली सी तेरी … Continue reading तेरी याद
काश कि हर मॉं अपने जीवन काल में अपने परिवार जनों को एकजुट देख पाए।
मॉं है तो मायका भी है मॉं है तो मन महका भी है वह प्यार दुलार व दुआ की बहार वो घर बुलाने के बहाने हज़ार वो हर फ़रमाइश का पूरा करना वो घंटों बैठ कर बातें करना मॉं है तो मायका भी है मॉं है तो मन महका भी है वो मायके जाकर सब … Continue reading मॉं से मायका (Maternal Home)
अब अपना बोझ वह तय कर लेगा, पुत्र है अब कमाऊ लाल,
एक का ख़र्चा तो कम होगा, पुत्र जो बन गया कमाऊ लाल.
बेटी के दहेज की कम हुई चिन्ता, कुछ मदद करेगा मेरा लाल,
अब पेनशन अपनी बचत बनेगी, घर में है अब कमाऊ लाल.
याद है बचपन की अठखेली वो पूछना एक दूजे से पहेली खेल खिलौने अद्भुत न्यारे गेंद व गुड़ीयॉं प्यारे प्यारे वो रंग भरी लम्बी पिचकारी ग़ुबारों में जल भर होली की तैयारी वो छत पर खेलना छुपन छुपाई बात बात पर करना लड़ाई याद आते हैं मेरे भैया प्यारे, वो दिल्ली के साँझ सखारे वो … Continue reading रक्षा बन्धन