सतगुरू स्वरूप

सतगुरू एक लेता नया आकार एवं बनता अनेक से एक। चोला बदल कर आया फिर से गुरू। निरंकारी समुदाय की सतगुरू माता सविंदर हरदेव के देहांत पश्चात उनकी सुपुत्री के सहयोग भरे कुछ शब्द पेश हैं

खटिया और कहानी

    दादी नानी की यह कहानी आँगन में जब बरसा पानी समेटा जा जल्दी से बिस्तर को खटिया तो थी भीग ही जानी रस्सी उसकी बदलनी ही थी हो चली थी बहुत ही पुरानी यादें समाई थी उस रस्सी पर नन्द भाभी की सुनी हर कहानी बोझ तले उन सब क़िस्सों के रस्सी ने … Continue reading खटिया और कहानी

तेरी याद

लो फिर से चली आई धुंधली सी तेरी याद दिल करने लगा फ़रियाद पैरहन पे गिरे यूँ आॉंख से क़तरे ज्यूँ ऑंचल में आ गई बरसात तेरी याद दम लेने ना देती घायल रहता है दिल का हाल मेरी यह तड़प, ये बेचैनी देती रुसवाई, करती बदनाम लो फिर से चली आई धुंधली सी तेरी … Continue reading तेरी याद

मॉं से मायका (Maternal Home)

मॉं है तो मायका भी है मॉं है तो मन महका भी है वह प्यार दुलार व दुआ की बहार वो घर बुलाने के बहाने हज़ार वो हर फ़रमाइश का पूरा करना वो घंटों बैठ कर बातें करना मॉं है तो मायका भी है मॉं है तो मन महका भी है वो मायके जाकर सब … Continue reading मॉं से मायका (Maternal Home)