सदियों से सताया तुमने किसने दिया है यह हक़
किसका हक़
सदियों से सताया तुमने किसने दिया है यह हक़
अच्छा किया जो तुम ने औक़ात याद दिला दी मुझ को जानती थी जिस घर को अपना उसी की बन्दी बन कर रह गई
साड़ीयॉं हर औरत की शान जो देती अलग पहचान
चलो आज समोसे का मज़ा लेते हैं
बदलते दशक के संग बदले कई हालात। आओ पढ़ कर देखो कैसे बदले हैं हाल।
Zindagi ka hoga jab khatm afsana Tum se mein bhi milne aoongi wahaan
एक गुमशुदा भाई को गरवापसी की दुहाई। एक प्रयास, शायद यह कविता उसे ले आए पास।
क्या हिन्दुओं को मिटाया जा सकता है?
कान्हा संग मिल, अठखेली करता गोपियों संग यह रास गरबा करता
भाषा न मात्र एक बोल चाल होती है! वह तो देश की संस्क्रती की अभिलाषा होती है! अपने संस्कारों का प्रतिबिंब, अति सम्माननीय होती है! राष्ट्र भाषा किसी भी राष्ट्र का गौरव चिन्ह होती है!