या फिर!

वो पूछते हैं ख़ैरियत  हम क्या जवाब दें सोच में ढूबे रहें  यॉं फिर  उदासी की चादर उतार दें तक़ाज़ा ए तकल्लुफ़ के तले मुस्कुराना लाज़िमी है मेरा ग़म को पर्दे में रहने दें  या फिर  ज़ख़्मों कि नुमाइश ही कर दें बह के सूख चुकी काजल की कतरन  सिकीलधी की आँखों के धब्बे  पोंछ कर साफ़ कर दें  या फिर  गहराई निगाहों तले रहने दें चेहरे की रूठी रंगत क्या लौट आएगी कभी बेनक़ाब हो सामने जाएँ  या फिर  ख़ुशनुमा शिगूफ़ा ओढ़ लें मैली हो चलीं वो झुर्रियों की झालर  हँसी होंठों की भी समेट ले गईं  ज़ाहिर कर दें ख़ूबसूरती का जनाज़ा  या फिर बेमुरव्वत बेक़रारी बिखेर दें तहज़ीब की सिलवटें उधड़ने को आईं हमारी हर हरकत पे हुई जग हँसाई  दामन में दबोच लें सुकून को या फिर  यह एैलान ही कर दे कि तेरी तंगदिल हस्ती ने हमें कर दिया पराई सिकीलधी

ग़ुब्बारे वाला

A Balloon Vendor in the late evening hours in Jaipur वह बेच रहा था गुब्बारे! कई तरह के रंग वाले, कुछ गहरे लाल, कुछ नीले! कुछ सादा, कुछ दिखते चमकीले ! कितने नन्हे दिलों को बहलाता, वह बेचारा ग़ुब्बारे वाला| दिन ढलते सॉंझ की छॉंव तले, अपने दुख दर्द को छोड़ परे, वह ख़ुशियों की … Continue reading ग़ुब्बारे वाला

मेरी बिन्दी मेरी अनुभूति Meri Bindi Meri Anubhuti

मेरी बिन्दी मेरी अनुभूति  कोई करता रक्त का दान कोई परिश्रम व समय का दान कोई करते खाद्य पथार्थ दान कुछ विशेष गण करते घन से दान मत भूलो इतिहास हमारा माथे लम्बा तिलक सज़ा कर वीरों ने दिए प्राणों के बलिदान हमारी सभ्यता के चिन्ह हैं महान क्यों शठ बन हम तजते यह स्वाभिमान … Continue reading मेरी बिन्दी मेरी अनुभूति Meri Bindi Meri Anubhuti