एैसी वसीयत

एैसी एक वसीयत तुम कर जातीं नाम मेरे तुम्हारे गुन कर जातीं जिन से थी तुम्हारी पहचान एै मॉं मैं बस तेरे आँगन की एक हूँ क्यारी याद हैं आतीं बहुत ही मुझको बातें तुम्हारी वह प्यारी प्यारी जो थीं कभी सिखलाई तुमने उन बातों पर दिल जाता बलिहारी सिकीलधी

तेरी याद

लो फिर से चली आई धुंधली सी तेरी याद दिल करने लगा फ़रियाद पैरहन पे गिरे यूँ आॉंख से क़तरे ज्यूँ ऑंचल में आ गई बरसात तेरी याद दम लेने ना देती घायल रहता है दिल का हाल मेरी यह तड़प, ये बेचैनी देती रुसवाई, करती बदनाम लो फिर से चली आई धुंधली सी तेरी … Continue reading तेरी याद