बचपन के वे आसमानों वाले महल हमारे मस्तिष्क में मचाते चहल पहल आपने भी यकीनन इन बादलों को देख कई अलग-अलग तरह के आकार जाने होंगे कभी वही बादल स्वप्न से अति मोहक व कभी भयानक क्रूर रूप वाले दिखते होंगे सिकीलधी Published in the July Edition of “Hindu Deep” by Hindu Council of Kenya
शहर
यह इमारतों की है बस्ती!
यह इमारतों की है बस्ती , दूर तलक ईंट पत्थर की हस्ती ! आकाश को ज्यूँ चूमने लगतीं , लम्बी इमारतों की आवारागर्दी! चाहे दिन हो गर्म या हो मौसम में सर्दी , इन लम्बी रहगुज़र में आबादी पलती! ढलती धूप को शांत सा साया, जाने कितनों के मन को भाया ! आँच दिखाकर हल्की व ठंडी, धूमिल किरनों की सरपरस्ती ! चमक बिखेर मकानों के गिर्द , जैसे स्वयं को उन पर ओढ़ती! इस बस्ती की बात ही निराली , ज्यूँ जादूगर की माया नगरी ! कारों बसों के कोलाहल संग, एक अजब सी ऊर्जा उपजी! हैडलाइटों की सारी झिलमिलाहट , बिल्डिंगों की खिड़कियों पर बरसती !
बादलों का शहर
बादलों के शहर की जानी अनजानी, नई पुरानी, अजब पर पहचानी सी बातें रोमांचित करती हैं।