A loving heart and caring arms A Father has those special charms Protecting his little ones from all storms A father is defined in various forms He is the Superman of all imagination For the little kid daddy is all fascination Learning to say bye when he leaves for office A father is a symbol of fulfilling all promise He is … Continue reading A Father is defined!
Verse
I Bid You Adieu!
As you move on to meet those 13 few….. That you mentioned and missed every day….. The vacuum that you have left….. Shall be felt for days to come….. Read on for the complete tribute poem!
Randal Mata na Lota!
Randal Mataji‘a altar at a private ceremony by a family. 4/06/23 Nairobi She washes my feet She touches my feet Symbolizing the Mother within me The auspicious occasion of worship As Randal Mataji pays visit in her household They sat in a row all wearing red The daughters in law of their family Adorned in … Continue reading Randal Mata na Lota!
Beat Plastic Pollution!
The Vehicle that encourages conservation. Conservation reminds of older generation. Older generation that used and re-used. The fountain pens holding liquid ink to write. Write not using single use pens looking bright. Bright shall be the future of the atmosphere. Read on for more by cllicking on the link ....Beat The pollution....
चाय/ Chai
उसकी यादों का आलिंगन
जब वह थी तो मैं बेपरवाह थीबेपरवाह थी क्योंकि मेरी माँ थी कुछ समझ न आता, कोई दुविधा होती बस झट से उँगलियों से उसका नंबर मिलाती हर समस्या का समाधान थी मॉं Sikiladi हर दुविधा का निष्कास थी मॉं उसके घरेलू उपायों में थी मेरी तबियत हर रोग, हर दर्द का उपचार थी मॉं अब लगता है कि जब फ़ोन करती थी वह और बेवजह व्यस्तता जताती थी मैं कितनी गलती करती थी मैं Sikiladi उसका दिल दुखाती थी मैं अब वही सिलसिला चल रहा है बस अब सामने मॉं नहीं, मेरे बच्चे हैं Sikiladi हर संकट में, हर दुविधा में वे मुझसे उपाय तलाशते हैं अब समय की कमी तो रही न मगर अपने ही जने हुए मुझ से अधिक व्यस्त से है उनका हर पल ज्यूँ बेशक़ीमती सा है और मैं विवश हो इन्तज़ार में बैठी हुई फिर सोचती हूँ काल चक्र भी कैसा है कल जहां मैं थी आज मेरी संतान है और मुझे भी तो मॉं वाली पदवी मिली है जैसा देखा था उसको करते हुएSikiladi वहीं सब मैं आज कर जाती हॉं, मॉं जैसी आदर्श वादी न सही किन्तु कुछ कुछ उसके पद्ध चिन्हों पर चल जाती परिवार को न केवल पालने लगी हूँ मगर उसकी भाँति जोड़ने भी लगी हूँ जब दर्द दफ़्न कर सीने में, मुस्कुराती हूँ दर्पण भी मेरे चेहरे में उसकी झलक दिखाता है हर सुख संपन्न होते हुए, खुश आबाद क्षणों में भी बस एक कमी सी पाती हूँ Sikiladi मॉं के संग न होने पर , तन्हा खुद को पाती हूँ फिर दूजे ही क्षण इस विश्वास में जीती हूँ वह मेरे भीतर समाई है, कभी मेरी उँगलियों से पकाती दिखती है Sikiladi कभी मेरे वस्त्रों में वह सुगंध सी समाती है कभी अपनी ही ऑंखों की नमी में महसूस होती कभी सुकून के क्षणों में ह्रदय को तृप्त करती है कभी याद सुहानी बन तितली सी वह खिड़की के किनारे आ बैठती हैं Sikiladi और कभी चाय की चुस्की लेते … Continue reading उसकी यादों का आलिंगन
बुद्ध पूर्णिमा !
The full moon with its beautiful aura as seen on 5/5/23 तन्हा चॉंद का तन्हा सफ़र एक बादल से दूजे तसक बुद्ध पूर्णिमा की पावन रात लालिमा का उजाला लाई साथ सिकीलधी
सीखी न वह/ Seekhi na woh!
आज के #EmbraceEquity वाले समय भी कुछ ग्रहणियाँ ह्रदय में अश्रु छिपा बाहरी तौर से मुस्कुराती दिखती है । यह कविता उन स्त्रियों को समर्पित है जिन्होंने खुद को कहीं खो दिया है । क्या आप को यह कविता दिल से लगेगी? क्या यह कहानी आपकी है? क्या यह आपकी किसी अपनी की याद दिलाती हैं? क्या आप की मॉं अथवा दादी/नानी भी इस पीड़ा से गुज़र चुकीं हैं? अपनी टिप्पणी अवश्य साझा कीजिएगा ।
ईद और तीज
कुछ ईद मनाते रहे कुछ अक्षय तीज मना गए कोई दे क़ुर्बानी बकरे की अपनी ख़ुशी मना रहेSikiladi कोई बाँह पकड़ एक दूजे की अपने संस्कार दर्शाते रहे कुछ की आज़ानें पहुँचीं कानों तक किसी के शंखनाद ह्रदय को छू गए किसी के रोज़ों में भी जीव हत्या हुई किसी के हर उपवास में फल आहार हुआ किसी की सेवियों में उनकी मिठास सही कुछ के नारियल में धर्म की पावनता Sikiladi किन्ही के नात नतमस्तक कराते होंगे किन्ही की घंटी पे भी सिर झुक जाते है कोई हर दूजे को काफ़िर जानते हैं कोई हर ग़ैर को भी अपना मानते हैं Sikiladi किसी का जश्न क़ुर्बानी माँगता है किसी का उत्सव फूल, पत्तों से सजता है कहीं गोश्त से महफ़िल सजती है कहीं हल्दी कुमकुम से स्वागत होता है
Hanuman Ji!
Hanuman Ji @Jalaram Temple, Nairobi as adorned on Hanuman Janmotsav: 06/04/23 Placed amid balloons gold and red All neatly secured, perhaps by a thread Adorning the specific deity of the day In celebration of his earthly birthday Hanuman ji the param bhakta of Ram Protects one and all with his calm Invoke his blessings by … Continue reading Hanuman Ji!