Published in Hindu Deep Edition September 2025 A poetry by Sikiladi describing the grain picking by birds.
Hindi
Sharad Purnima
अमृत का संचार हो रहा गोपियों संग रास हो रहा चाँद जो चमका चॉंदी सा हर्षित हर एक मन हो रहा खीर बना कर भोग लगा है लक्ष्मी जी का अहसास हुआ है अक्षत रख प्रार्थना हम करते उत्साहित हर मन हुआ है सिकीलधी
साँवरी
जड़
जुड़े जो रहे अपनी जड़ों से , सम्भल ही जाते उड़ते परों से A deep rooted reflection of life Nature Photography 18/09/25 London Roadside
धुंधला आसमाँ!
A Foggy Morning 18/08/25 Nairobi
शिवलिंग
शिवलिंग शिवलिंग पर चढाये जल को लाँघा नही जाता और शिवलिंग की परिक्रमा आधी की जाती है.शिवलिंग पर अर्पित नैवेद्य भी नहीं खाया जाता उसे गऊ वंश को खिला दिया जाता है क्योंकि उनमें ही इसकी शक्ति को सहने की क्षमता होती है…! भारत का रेडियोएक्टिविटी मैप उठा ले हैरान हो जायेंगे भारत सरकार के … Continue reading शिवलिंग
संदूक पुराना
ख़ुद्दारी
औरत अपना सर्वस्व जिन पर क़ुर्बान कर जाती है, अक्सर वही उसके असीम दुख का कारण बन जाते हैं ।
खुला आसमाँ
पुकारता है प्रकृति प्रेम जब जबउत्साह बढ़ता है तब तबखुले आसमाँ से आती पुकारख़ुद को कोई रोके कब तक सिकीलधी