मैं तुझमें , तू मुझमें रसिया, राधा ख़ुद में कान्हा निहारे
कृष्णा
मैं तुझमें , तू मुझमें रसिया, राधा ख़ुद में कान्हा निहारे
मैं ही तुम, तुम ही मैं, एै श्याम सलोने, कान्हा प्यारे
बादलों के शहर की जानी अनजानी, नई पुरानी, अजब पर पहचानी सी बातें रोमांचित करती हैं।
मॉं की याद जब भी है आई, दर्द हुआ इतना की बेटी बिलबिलाइ।
चाहा था समेट लूँ यादों के धागे पिरो लूँ बीते कल के कुछ मोती मगर कमबख़्त दिल दे गया धोखा हर याद पिरोने से पहले कर गया दगा़ आँखों से बहने लगी एक एक याद गुज़रे समय की हूक करती फ़रियाद न बुला! न रुला! एै दिल ए नादान मुझे अतीत बन कर ही रहने … Continue reading यादें
मीठी सी मुस्कान वह प्यारी बहुत दिलों को देती दिलदारी चेहरे की मासूमियत झलकती गम्भीर सी सोच के तले कोटू अन्कल वह बातें प्यारी याद सदा रहेंगी न्यारी बहुत अचानक किया चलाना निरंकार की शरण था जाना वो बचपन के छुट्टियों के दिन जब मनु व रीटा हांगकांग आते वह आपका हर रात हमारा … Continue reading कर गए चलाना
अपनी सभ्यता भूल, निभाया पराया धर्म। अपनों को तज, ग़ैरों को मनाया ।
फिर आ गया आज वह दिन क्ष्राद्ध का महीना और बर्सी का दिन हर वर्ष यही तारीख़ जब आती दर्द भरी कुछ यादें ले आती डैडी आपका हम सब को छोड़ जाना जहाँ से दूर अपना जहाँ बनाना और फिर बस यादों की सीमा में बस जाना हुए तेइईस साल जब आप हुए रवाना मेरे … Continue reading बर्सी का दिन
जन्मदिन मनाना, झूमना गाना और अपनों संग मिल हाहाकार मचाना।
A celebration of Hindi Diwas by Kenbharti on 14/9/18 when the topic was past and present poets and their works.