भारतीय प्रेम इस भारतीय प्रेम की परिभाषा ही कुछ अलग औपचारिकता दिखाते सुनाते न हमजोली एक दूजे के सहायक बन जीवन के अंतिम छोर तक अंधियारे की काली रात से उज्ज्वल भोर तलक साथी, हमसफ़र ही तो हाथ बटाएगा जब संतान जवान हो, दूर जा बसे वही तो है जो हर निवाले पर साथ निभाएगा बती बुझानी हो या फिर दही फ्रिज में रखनी हो गैस का सिलेंडर बदलना हो या चूल्हा बुझाना हो सुबह की चाय संग साथ बैठ अख़बार पढ़ना दूध वाले से बर्तन में दूध लेने से नल से बाल्टी भरने तक सब काम सहज हो जाता है, जब साथी अपना, संग हो गुडमार्निंग व गुडनाईट की औपचारिकता रहे न रहे हरि ऊँ व जय श्री कृष्णा, या फिर ख़ुदा की इबादत... धर्म करम के कार्य करते दोनों इक दूजे संग सिकीलधी
कविता
वियोग
मॉं बाप का वियोग कम्बख़्त चीज़ ही ऐसी है, जग भर के रिश्ते हों चाहे जीवन में.... न कोई पिता सम्मान, न कोई मॉं जैसी है कभी शायद वो भी रोए होंगे इस वियोग वश आज हमारी बारी है, बिछड़ना लगता भारी है क्या कल की पीढ़ी भी सहेगी यह सब? कौन जाने यह वियोग किस किस पर भारी है सिकीलधी
दोस्ती
नए पटल पर शादी
आज के कोविड वाले समय में विवाह करना एक नया ही अंदाज़ हो गया है। न रिश्तेदार दूर देश सफ़र कर पाते, न बहुत से अपने, अपनों का साथ निभा पाते। मगर ऐेसे में एक नए पटल पर साथ निभाने का, व दूर से हर उत्सव में शामिल होने का भी अवसर मिलता है।
देशद्रोह
The disturbances in Delhi on the Republic Day of India was a shameful act by those who spread the devastation and terror. This poem is inspired by the situation.
पंछी
A bird in my balcony
ब्रह्मकमल
मोह का पाठ
मॉं की ममता होती नाज़ुक, जाती लाल अपनेु पर बलिहारी। यह कहानी उस मॉं के ह्रदय के बदलते विचारों की है.............