कविता
सावन/ Saawan
खिले गुल
गुल व गुलदस्ता
ममता
मॉं Maa
मॉं तेरी याद
कुछ तुम्हारी शिकायत व डाँट सुन सकूँ , कुछ अपने गिले शिकवे कह सकूँ , साँझा कर लें फिर से वे ढेरों सित्तम, कुछ हंस कर, कुछ आँसू बहाकर तुम हम.........
तुम्हारा जन्मदिन
तेरी याद जो आई मेरी ऑंखें ढबढबाईं कुछ ख़ास है आज का दिन आज के दिन मनाते तुम्हारा जन्मदिन मगर अब वही दिन बन कर रह गया याद का दिन तुम जो रूठ चलीं जहाँ से ढूँढती हूँ तुम्हारे निशाँ से वो छोटी छोटी बातें, यादें बन समेट लेती हैं एक आलिंगन बन हर क्षण … Continue reading तुम्हारा जन्मदिन
स्थिरता Sthirta
जीवन केवल एक कर्म क्षेत्र है अभिनय निभाना केवल धर्म है...... ....... जो आया है उसको जाना ही होगा यह जान समझ जीवन जीना होगा.......
विध्वत्व होली Vidhvatv Holi
आया होली का रंगीला त्यौहार क्या उनका होगा रंगों से साकार क्या उनके सपनों को मिलेगा आकार क्या होली खेलने आएगा कोई उन संग क्या उन पर डालेगा आके कोई रंग