कल शाम सोशल मीडिया पर देखा एक चेहरा, जिसको देख अचानक दिल का एक सोया हिस्सा धड़का वह उस का चेहरा था… वर्षों बाद यकायक उस तस्वीर को देख एक चलचित्र की तरह बहुत कुछ…. जाने क्यों मस्तिष्क भीतर घूमने लगा शोक समाचार था…. वो गुज़र चला था, अलविदा कर गया था कई घिनौनी यादें फिर लौट आईं थीं समझ ही न आया कैसा बर्ताव करूँ राहत की साँस लूँ या शोक मनाऊँ कहते हैं जाने वाले के बारे में अच्छा ही बोलो मगर, यह मन है कि बग़ावत सी करता है वह मेरा अपना नहीं था, बिलकुल नहीं था मगर इतना ग़ैर भी तो नहीं था आख़िर वही तो था…. जिसने मेरे कोमल जिस्म को कुरेदा था उसकी घिनौनी हरकतों कि जानिब मेरा बचपन महफ़ूज़ ही न था उसका नाम सुनते ही बेस्वाद ख़्याल आते है नफ़रत की है उससे बड़े जी जान से फिर उसके मौत की ख़बर जाने क्यों उसकी आत्मा के सुखी होने की दुआ माँगती है दिमाग़ की जद्दोजहद ने किया बेक़ाबू एक बार फिर महसूस हुई … मुझे मेरे ही जिस्म से उसकी बदबू क्या ये सोचना कोई पाप है अच्छा हुआ कि वो गुज़र गया सिकीलधी
कविता
उसकी आँखें / Uski Aankhein!
https://anchor.fm/sikiladim/episodes/Uski-Aankhein-e1jg95q उसकी आँखें उसकी आँखें कुछ ख़ामोश कुछ नम उसके अपनों ने ही शायद ढाया सितम जाने अनजाने में ही सही, उसने ओढ़ ईश्वरीय चोला इच्छा पूर्ति की परिवार जनों की अपनी तमन्नाओं को रख ताला बन्द वह पाँच लाख वाला महँगा लहंगा बिटिया को दिलाना जिसके बोझ तले निकला सा जाए है दम वह बहुरानी को नया नेकलेस सेट दिलवाना जिसके हीरों की दमक से आती वाह की चमक वह बेटे की नई कार की फ़रमाइश माडल नया ख़रीद उसके अलग घर का सपना पूरा कर घिस गई गर्दन दामाद को भी चाहिए महँगी वाली घड़ी कैसे न देगा? बेटी की कर के विदाई सोचा,अब खर्चा कुछ तो होगा कम पोती भी बाँहों में झूल माँगती तोहफ़ा दिखा कर अल्हड़ पन दादा तो न नहीं करेंगे, चाहे जेब में हो या न हो दम पोता भी कालेज की फ़ीस की देता दुहाई दादा पे रख उम्मीद बाइक का लेटेस्ट माडल है माँगता बन गई एक और रसीद जब फादर्स डे आता , रेस्टोरेन्ट में जागर मनाया जाता मगर उस पिता की खुद की इच्छाओं पर किसी का ध्यान न जाता पोती पास आ खेलने से कतराती समय न होने का बहाना बनाती पोता बूढ़े हो रहे दादा से दूर जा टेनिस व फुटबॉल का मैच देखता उसे भी अच्छा लगता, यदि उसके संग बैठ मैच वो देखता पोती से नई फ़िल्म की कहानी सुनकर शायद मन बहल जाता बेटी, बेटे व बहू से तो आशा रखी ही न जाती अकेले बैठ तन्हाई में पत्नी की याद उसे बहुत सताती उसकी ऑंखें कुछ ख़ामोश कुछ नम जीवन में हैं देख लिए हर पल बदलते लोगों के ढंग पिताजी सुन के, पापा या डैडी सुन के … Continue reading उसकी आँखें / Uski Aankhein!
प्रेम से रहो!
https://videopress.com/v/CM74pns4?resizeToParent=true&cover=true&preloadContent=metadata&useAverageColor=true जीना है जब तक. क्यों न करे मोहब्बत ! रखें भाई चारा, न लें किसी की तोहमत! यादों की छोड़ छाप जहां में, ख़ुशनुमा करें खुद की क़िस्मत! आपसी नाता निभाएं , ईश्वर की मान नेमत! सिकीलधी
Guru Tuhi Tu!
A Tribute to Baba Hardev Singh Ji
बाबा हरदेव वाली राह! Baba Hardev wali raah!
“धर्म जोड़ता है, तोड़ता नहीं “ बाबा हरदेव सिंह “Let blood flow in the veins, not in the drains” Baba Hardev Singh Ji.
पतंग सी!
मॉं कब बूढ़ी हो गई ! Maa kab boodhi ho gayi!
एक ऐसी संतान जिसे यकायक मॉं के बुढ़ापे का अहसास हुआ।
मॉं का मायका
https://anchor.fm/sikiladim/episodes/ep-e1hatocमॉं का मायका मॉं जब भी मायके जातीख़ुशी की लहर है छा तीउसके प्यार व दुलार भरी बातेंपूरे परिवार को सुखद अहसास दिलातीं मॉं जब जब मायके जातीछोटे भाई बहनों पर बलिहारी जातीघुल मिलते सब उसके इर्द-गिर्दएकता का नया संदेशा याद दिलाती मॉं जब भी मायके जातीछोटे भाई भतीजों में पिता को खोजतीभाभियों पर ममता … Continue reading मॉं का मायका