मुसाफ़िर / Traveler

आया मेरे आंगन एक मुसाफ़िर , मतवाली सी चाल दिखाने.......सिकीलधी निहारे पेड़ के भीतर बसी कोई अपने पसंद की चीज़ ढूँढने ..........सिकीलधी चला है उड़ने यहाँ से अब वो, कहीं और आशियाँ बनाने......सिकीलधी थामे मुख में ढाल की टहनी, नैनों से चहूं ओर निहारे.......सिकीलधी

आओ मैय्या

छाया है आज एक सन्नाटा मानव बैठा पहनकर मुख्खौटा भयभीत हुए सभी जनगण सूना सा दिखता हर प्रांगण नहीं यह पहली बार हुआ है काल का सुदर्शन चक्र चला है महामारी ने किया आतंकित विश्व का हर जन हुआ सीमित याद करो मॉं जब उपद्रव मचा था महिषासुर का तुम ने वध किया था दानव दैत्य … Continue reading आओ मैय्या

Silence!

From the silence Hope shall bloom And then there shall be   No room left for gloom A Child's prancing so cute Silently peeping in the mute Giving stealthy looks around Picking on wisdom from surround The flowers pleasant the grass so green Water them with love Granting them a new sheen Boredom thy name … Continue reading Silence!