मेरा सम्मान

जब अख़बार में नाम छपता है मेरा, और तस्वीरों सहित ज़िक्र होता है ! तब उन्हें भी मुझ पर गर्व होता दिखे , मेरी सफलता उन्हें अपने जीवन का अंग लगे।

छुआ उसने!

छुआ उसने कुछ इस तरह आज जैसे कभी छुआ न था पहले कभी उसकी नज़रों ने छुआ बिजली की तरह और दिल के हर कोने में तरंग सी जागी उसके हाथों बीच समाया मेरा हाथ और जन्नत का हो गया अहसास  वो चुम्बन गालों पर दिया लेकिन… आत्मा की गहराई को थपकी सी मिली  छुआ उसने अपने प्रेम भरे शब्दों से  और मैं ने गंगा सी पवित्रता महसूस की उसके आलिंगन का मीठा अहसास  महका गया मेरी रूह को दे सुखद आभास  छुआ उसने कुछ इस तरह से आज इतराई मैं खुद पे, जागा नया विश्वास  हुई हूँ आज बहुमूल्य उसकी वजह से  जिसने मुझे खुद मुझसे ही बेख़बर किया  सिकीलधी