झांकती ज़िन्दगी

बंद दरीचों से झॉंकती ज़िन्दगी लेकर पैग़ाम उम्मीदों भरे छन कर ज़रा सी धूप बिखरती ओलिएन्डर की शाख़ों तले दिल की धड़कन तेज़ हो चली आशाओं के दीप हुए उज्ज्वल अब तो आजा, दिन भी है निखरा हम राह तकते ज़ुल्फ़ें बिखरा इन्तज़ार की हुई इन्तेहा सफ़र ए सिकीलधी बेहद तन्हा सिकीलधी

विध्वत्व होली Vidhvatv Holi

आया होली का रंगीला त्यौहार क्या उनका होगा रंगों से साकार क्या उनके सपनों को मिलेगा आकार क्या होली खेलने आएगा कोई उन संग क्या उन पर डालेगा आके कोई रंग

हिन्दी दिवस : Hindi Divas

भाषा न मात्र एक बोल चाल होती है!
वह तो देश की संस्क्रती की अभिलाषा होती है!
अपने संस्कारों का प्रतिबिंब, अति सम्माननीय होती है!
राष्ट्र भाषा किसी भी राष्ट्र का गौरव चिन्ह होती है!