बंद दरीचों से झॉंकती ज़िन्दगी लेकर पैग़ाम उम्मीदों भरे छन कर ज़रा सी धूप बिखरती ओलिएन्डर की शाख़ों तले दिल की धड़कन तेज़ हो चली आशाओं के दीप हुए उज्ज्वल अब तो आजा, दिन भी है निखरा हम राह तकते ज़ुल्फ़ें बिखरा इन्तज़ार की हुई इन्तेहा सफ़र ए सिकीलधी बेहद तन्हा सिकीलधी
Hindi
ईश्वरदास / Ishwardas
गुल व गुलदस्ता
विध्वत्व होली Vidhvatv Holi
आया होली का रंगीला त्यौहार क्या उनका होगा रंगों से साकार क्या उनके सपनों को मिलेगा आकार क्या होली खेलने आएगा कोई उन संग क्या उन पर डालेगा आके कोई रंग
Hichhki हिचकी
हिन्दी दिवस : Hindi Divas
भाषा न मात्र एक बोल चाल होती है!
वह तो देश की संस्क्रती की अभिलाषा होती है!
अपने संस्कारों का प्रतिबिंब, अति सम्माननीय होती है!
राष्ट्र भाषा किसी भी राष्ट्र का गौरव चिन्ह होती है!
हैप्पी न्यू ईयर
अपनी सभ्यता भूल, निभाया पराया धर्म।
अपनों को तज, ग़ैरों को मनाया ।
कवि गोष्ठी
A celebration of Hindi Diwas by Kenbharti on 14/9/18 when the topic was past and present poets and their works.