A Foggy Morning 18/08/25 Nairobi
प्रकृति
खुला आसमाँ
पुकारता है प्रकृति प्रेम जब जबउत्साह बढ़ता है तब तबखुले आसमाँ से आती पुकारख़ुद को कोई रोके कब तक सिकीलधी
निरंकार की नेमत!
दिन ढलने लगा!
रात का मुसाफ़िर
पुष्पा की याद!
तुम बिन!
तेरी रहमत!
एक तू ही निरंकार