ओढ़ लेती हूँ आज भी वो ग्रे वाली पुरानी शाल महसूस करती हूँ उसमें तुम्हारा छुपा सा गहरा प्यार शाल तो अनेकों है मगर इस ग्रे वाली सम कोई नहीं न यह पश्मीना, ना शाहतूश न ओश्वाल, न कोई ब्रांड Sikiladi न ही महँगी कड़ाई, न लेटेस्ट ट्रेंड फिर भी मन को भाती हर दिन उसे ओढ़ एक गर्म सी ठंडक मिलती हाँ ठंड से बचाती प्यार की गर्माईश ह्रदय को ठंडी राहत मिलती आपके ममत्व की गर्मी मिलती वहीं ममत्व जो आपने जाने कितनों को दिया और उन कितने ही अजनबियों बीच मैं, तुम्हारी अपनी, औलाद की औलाद भाग्यशाली हूँ जो मैंने पाया आपका वह अनकहा सा प्यार शाल तो केवल वस्तु निमित्त है विरासत में पाया आपका दुलार व संस्कार वह सेवा वाली तबियत Sikiladi वह सत्संग वाली फ़ितरत और वह सिमरन करने वाली वसीयत आप कहतीं थीं न, आत्मा का भोजन है ज्ञान और सेवा, सत्संग, सिमरन में बसें हो प्राण बस शायद वहीं कुछ कुछ मेरे हिस्से आया आपकी याद व सद्गुरू का साया Sikiladi इस गुप्त ज्ञान का रहस्य कोई विरला ही जान पाया वह प्रात: अमृतलाल उठ सिमरन करना वह तुम्हारा भक्ति रस के गीत गाना जिसका कभी मैंने किया उलाहना व मारा ताना वहीं सब आज बन गया है मेरे जीवन का ख़ज़ाना इतनी सी दास्तान, इतना सा ही अफ़साना शाल देना तो शायद था फ़क़त एक बहाना उसमें बुन दिया था आपने संस्कृति का निभाना दादी अम्मा धन्यवाद करती हूँ आपका मेरी ही बेटी बन चुना आपने फिर मेरे जीवन में आना कोई माने न माने, मैंने तो है यह जाना आपका मेरा नाता है सदियों पुराना सिकिलधी https://youtu.be/d_k0iR1ENrw?si=22vYKgCZT1vtydE0
अफ़साना
Nalina
Zindagi ka hoga jab khatm afsana
Tum se mein bhi milne aoongi wahaan