
अलौकिक और पुण्यदायिनी माँ नर्मदा के जन्मदिवस यानी माघ शुक्ल सप्तमी को नर्मदा महोत्सव मनाया जाता है, इस दिन नर्मदा नदी में स्नान का विशेष महत्व होता है।
माँ नर्मदा प्राकट्योत्सव के एक दिन पहले बड़ी संख्या में लोग नर्मदा नदी के तट पर पहुंचते हैं और भजन कीर्तन करते हैं, अगली सुबह लोग नर्मदा में स्नान के बाद शिव मंदिर में पूजा करते हैं।
नर्मदाजी का तट सुर्भीक्ष माना गया है, शास्त्रों के अनुसार माँ नर्मदा के पूजन, दीपदान, स्नान एवं दर्शन मात्र से मनुष्य के पापों का नाश हो जाता है।
महाभारत, रामायण सहित अनेक हिंदू धर्म शास्त्रों में माँ नर्मदा का उल्लेख मिलता है।
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