बेटियाँ कब! जाने कब वह बड़ी हो जाती हैं कल की फुदकती बच्चियाँ सयानी हो जाती हैं नन्हे पैरों की छन छन पायल आँगन में राग सुनाती है छोटे छोटे हाथों से हम बड़ों को थामने लगतीं हैं कब! जाने कब वह बड़ी हो जाती हैं माँ की देखा देखी फ़ैशन थीं सीखतीं पर्दे पीछे … Continue reading कब! जाने कब!