https://youtu.be/Jjgzi72uDqU?si=Ta_8d_0wKCz3RJRq केन्या के नैरोबी शहर में हिंदू परिषद द्वारा एक सांस्कृतिक सम्मेलन मनाया गया जिसके तहत एक कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ । कवि सम्मेलन का शीर्षक था “नवरस के रंग, कवियों के संग “ जिसमें करुण रस दर्शाती यह कविता “अंतिम संस्कार “ सुनाई गई । सिकीलधी
पत्नी
नारी का सम्मान!
https://videopress.com/v/kSvbQjg9?resizeToParent=true&cover=true&preloadContent=metadata&useAverageColor=true Padma Harish Manghnani from Nashik speaks about respecting women.
अंतिम संस्कार
मगर वह जो चिर निद्रा सो रही….. मौत में भी आकर्षित लगती रही …. कितना सुंदर लगता है उस पर शृंगार…. जिन हाथों से कभी पहनाई थी वरमाला …… उन्हीं हाथों से अपनी पत्नी को विदाई वाली पहनाई माला
लौट आओ
एक गुमशुदा भाई को गरवापसी की दुहाई।
एक प्रयास, शायद यह कविता उसे ले आए पास।