मेरी सखी

  प्यारी बिन्दू कल रात तुम आई सपने में मेरेमेरे ह्रदय के थे खिल उठे कपोलेतुम्हारे बालों में कान के पीछे वह फूलजामुनी और नारंगी वह फूलकितनी सुन्दर दिख रही थी तुमहम दोनों ने बाँहों में बाँहें पकड़बहुत देर तक एक साथ डाँस कियाडेरों बातों का ख़ज़ाना था खोलाऔर सब से अच्छी बात यह थीकि … Continue reading मेरी सखी

यादें

चाहा था समेट लूँ यादों के धागे पिरो लूँ बीते कल के कुछ मोती मगर कमबख़्त दिल दे गया धोखा हर याद पिरोने से पहले कर गया दगा़ आँखों से बहने लगी एक एक याद गुज़रे समय की हूक करती फ़रियाद न बुला! न रुला! एै दिल ए नादान मुझे अतीत बन कर ही रहने … Continue reading यादें