बर्सी का दिन

फिर आ गया आज वह दिन क्ष्राद्ध का महीना और बर्सी का दिन हर वर्ष यही तारीख़ जब आती दर्द भरी कुछ यादें ले आती डैडी आपका हम सब को छोड़ जाना जहाँ से दूर अपना जहाँ बनाना और फिर बस यादों की सीमा में बस जाना हुए तेइईस साल जब आप हुए रवाना मेरे … Continue reading बर्सी का दिन

तेरी याद

लो फिर से चली आई धुंधली सी तेरी याद दिल करने लगा फ़रियाद पैरहन पे गिरे यूँ आॉंख से क़तरे ज्यूँ ऑंचल में आ गई बरसात तेरी याद दम लेने ना देती घायल रहता है दिल का हाल मेरी यह तड़प, ये बेचैनी देती रुसवाई, करती बदनाम लो फिर से चली आई धुंधली सी तेरी … Continue reading तेरी याद

मॉं

  तेरे आँचल की छांव तले मॉं अनेकों लाल पले चाहे छोटे हों या बड़े तुझको सभ ही लगते भले ठोकर खाते, गिरते पढ़ते घबरा जाते जब हम ढर् से धूल भरा वो तेरा आँचल सहला जाता मॉं हर ग़म से अब जो हम परदेस आ बसे गर्दिशों की धूल तज कर फँसे याद तेरी … Continue reading मॉं