एैसी वसीयत

एैसी एक वसीयत तुम कर जातीं नाम मेरे तुम्हारे गुन कर जातीं जिन से थी तुम्हारी पहचान एै मॉं मैं बस तेरे आँगन की एक हूँ क्यारी याद हैं आतीं बहुत ही मुझको बातें तुम्हारी वह प्यारी प्यारी जो थीं कभी सिखलाई तुमने उन बातों पर दिल जाता बलिहारी सिकीलधी

मॉं से मायका (Maternal Home)

  मॉं है तो मायका भी है मॉं है तो मन महका भी है वह प्यार दुलार व दुआ की बहार वो घर बुलाने के बहाने हज़ार वो हर फ़रमाइश का पूरा करना वो घंटों बैठ कर बातें करना मॉं है तो मायका भी है मॉं है तो मन महका भी है वो मायके जाकर … Continue reading मॉं से मायका (Maternal Home)

मॉं

  तेरे आँचल की छांव तले मॉं अनेकों लाल पले चाहे छोटे हों या बड़े तुझको सभ ही लगते भले ठोकर खाते, गिरते पढ़ते घबरा जाते जब हम ढर् से धूल भरा वो तेरा आँचल सहला जाता मॉं हर ग़म से अब जो हम परदेस आ बसे गर्दिशों की धूल तज कर फँसे याद तेरी … Continue reading मॉं