यादों की चादर

ओड़ ली मॉं आज फिर तेरी यादों की चादर तुझे याद करआज दिल हुआ जाए बेकल तुम थी तो दुनिया का अंदाज़ अलग था तुम्हारे जाने से, रिश्तों का फीका सा रंग था याद आती हैं बातें वह बचपन वाली सुहानी कितनी ही रातों में सुनी हमने तुमसे कहानी ख़ुद पढ़ी लिखी न हो कर भी, हम … Continue reading यादों की चादर

मॉं से मायका (Maternal Home)

  मॉं है तो मायका भी है मॉं है तो मन महका भी है वह प्यार दुलार व दुआ की बहार वो घर बुलाने के बहाने हज़ार वो हर फ़रमाइश का पूरा करना वो घंटों बैठ कर बातें करना मॉं है तो मायका भी है मॉं है तो मन महका भी है वो मायके जाकर … Continue reading मॉं से मायका (Maternal Home)

रक्षा बन्धन

याद है बचपन की अठखेली वो पूछना एक दूजे से पहेली खेल खिलौने अद्भुत न्यारे गेंद व गुड़ीयॉं प्यारे प्यारे वो रंग भरी लम्बी पिचकारी ग़ुबारों में जल भर होली की तैयारी वो छत पर खेलना छुपन छुपाई बात बात पर करना लड़ाई याद आते हैं मेरे भैया प्यारे, वो दिल्ली के साँझ सखारे वो … Continue reading रक्षा बन्धन