यादें

चाहा था समेट लूँ यादों के धागे पिरो लूँ बीते कल के कुछ मोती मगर कमबख़्त दिल दे गया धोखा हर याद पिरोने से पहले कर गया दगा़ आँखों से बहने लगी एक एक याद गुज़रे समय की हूक करती फ़रियाद न बुला! न रुला! एै दिल ए नादान मुझे अतीत बन कर ही रहने … Continue reading यादें

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