अम्माँ का पुलाव

ईश्वर भी मुस्कुराए होंगे शायद सुनके ये ईश्वर का स्वर। अम्माँ ने अब चूल्हा बुझा कर, पुलाव मेज़ पर परोस दिया था। हम सब प्राणी भी पुलाव के उन सामग्रियों की ही तरह, अपना ही राग अलापते हैं और ईश्वर की कृपा भुला ख़ुद अपना ही गुण गाते हैं।

Nature’s Trail – 3

PREAगगन के बदन पर छाई लालिमा तीर कमान की फैल गई गरिमा काश कि हो ईश्वर का सन्देश कोविड १९ को भगाने का आदेश सिकीलधीुSpread on the body of the sky, the tinted bow and arrow, comes as a message from above to shoot away Covid19 .......Sikiladi