मॉं

  तेरे आँचल की छांव तले मॉं अनेकों लाल पले चाहे छोटे हों या बड़े तुझको सभ ही लगते भले ठोकर खाते, गिरते पढ़ते घबरा जाते जब हम ढर् से धूल भरा वो तेरा आँचल सहला जाता मॉं हर ग़म से अब जो हम परदेस आ बसे गर्दिशों की धूल तज कर फँसे याद तेरी … Continue reading मॉं