विध्वत्व होली Vidhvatv Holi

आया होली का रंगीला त्यौहार क्या उनका होगा रंगों से साकार क्या उनके सपनों को मिलेगा आकार क्या होली खेलने आएगा कोई उन संग क्या उन पर डालेगा आके कोई रंग

रक्षा बन्धन

याद है बचपन की अठखेली वो पूछना एक दूजे से पहेली खेल खिलौने अद्भुत न्यारे गेंद व गुड़ीयॉं प्यारे प्यारे वो रंग भरी लम्बी पिचकारी ग़ुबारों में जल भर होली की तैयारी वो छत पर खेलना छुपन छुपाई बात बात पर करना लड़ाई याद आते हैं मेरे भैया प्यारे, वो दिल्ली के साँझ सखारे वो … Continue reading रक्षा बन्धन

राखी वाला लचीला धागा

राखी वाला आया त्यौहार घर में ज्यूँ आ गई हो बहार बहन फुदकती भाई के गिर्द सजाती थाली लिए स्नेह बिंदु लाती राखी वाला लचीला धागा चन्दन टीका, कुमकुम वाला सुहागा अक्षत भी माथे पर भैया के लगाती दीप जला मन उज्जवल करती आरती रक्षक भ्राता की उतारती उसकी लम्बी आयु की कामना करती भाई … Continue reading राखी वाला लचीला धागा