स्थिरता Sthirta

जीवन केवल एक कर्म क्षेत्र है अभिनय निभाना केवल धर्म है...... ....... जो आया है उसको जाना ही होगा यह जान समझ जीवन जीना होगा.......

विध्वत्व होली Vidhvatv Holi

आया होली का रंगीला त्यौहार क्या उनका होगा रंगों से साकार क्या उनके सपनों को मिलेगा आकार क्या होली खेलने आएगा कोई उन संग क्या उन पर डालेगा आके कोई रंग

भारतीय प्रेम Indian Love

भारतीय प्रेम इस भारतीय प्रेम की परिभाषा ही कुछ अलग औपचारिकता दिखाते सुनाते न हमजोली एक दूजे के सहायक बन जीवन के अंतिम छोर तक अंधियारे की काली रात से उज्ज्वल भोर तलक साथी, हमसफ़र ही तो हाथ बटाएगा जब संतान जवान हो, दूर जा बसे वही तो है जो हर निवाले पर साथ निभाएगा बती बुझानी हो या फिर दही फ्रिज में रखनी हो गैस का सिलेंडर बदलना हो या चूल्हा बुझाना हो सुबह की चाय संग साथ बैठ अख़बार पढ़ना दूध वाले से बर्तन में दूध लेने से नल से बाल्टी भरने तक सब काम सहज हो जाता है, जब साथी अपना, संग हो गुडमार्निंग व गुडनाईट की औपचारिकता रहे न रहे हरि ऊँ व जय श्री कृष्णा, या फिर ख़ुदा की इबादत... धर्म करम के कार्य करते दोनों इक दूजे संग सिकीलधी

वियोग

मॉं बाप का वियोग कम्बख़्त चीज़ ही ऐसी है, जग भर के रिश्ते हों चाहे जीवन में.... न कोई पिता सम्मान, न कोई मॉं जैसी है कभी शायद वो भी रोए होंगे इस वियोग वश आज हमारी बारी है, बिछड़ना लगता भारी है क्या कल की पीढ़ी भी सहेगी यह सब? कौन जाने यह वियोग किस किस पर भारी है सिकीलधी

नए पटल पर शादी

आज के कोविड वाले समय में विवाह करना एक नया ही अंदाज़ हो गया है। न रिश्तेदार दूर देश सफ़र कर पाते, न बहुत से अपने, अपनों का साथ निभा पाते। मगर ऐेसे में एक नए पटल पर साथ निभाने का, व दूर से हर उत्सव में शामिल होने का भी अवसर मिलता है।